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संख्या पध्दती भाग-1



By:Sihag Sir
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1 संख्या पध्दती भाग-1


1. प्राकृत संख्या (Natural Number) – गिनती की संख्या को प्राकृत संख्या कहते है . गिनती हम 1 से शुरू करते है! अत: प्राकृत संख्या 1 से शुरु होती हैं! जैसे 1, 2, 3, ----- इत्यादि



2. पूर्ण संख्या (Whole Number) :- प्राकृत संख्या में 0 सम्मिलित करने पर संख्या का समूह बनता है . जैसे 0, 1, 2,3,4,5,6, ……………

या W = 0 + N

पूर्ण संख्या को W से लिखते हैं

3. पूर्णांक संख्या (Integer) :- प्राकृत संख्या में 0 और ऋण संख्या सम्मिलित करने पर पूर्णांक संख्या प्राप्त होती है . --- जैसे -3, -2 , -1 , 0, 1, 2, 3,.............


4. सम संख्या (Even Number) :- 2 से विभाजित संख्या . जैसे 0, 2, 4,6,8,10...----


5. विषम संख्या (Odd Number):- ऐसी संख्या जो 2 से पूर्ण रूप से बिभाजित नहीं हो. जैसे 1, 3, 5, 7---

6. भाज्य संख्या (Factorial Number) :- ऐसी प्राकृत संख्या जो 1 या स्वयं के अतिरिक्त दूसरी संख्याओ से विभाजित हो जाये. जैसे 4, 6, 8, 9,10,---


7. अभाज्य संख्या(Prime Number) :- 1 से बड़ी ऐसी प्राकृत संख्या जो 1 या स्वयं के अतिरिक्त किसी अन्य संख्या से विभाजित न हो. जैसे 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, 31, 37, 41, 43, 47, 53, 59, 61, 67, 71, 73, 79, आदि ।

Note:-  ( प्रथम अभाज्य संख्या 2 है।जो केवल प्रथम अभाज्य सम है। प्रथम अभाज्य संख्या के अलावा अन्य सभी अभाज्य संख्या विषम है।)
( संख्या एक न तो भाज्य है न ही अभाज्य है।)

8. परिमेय संख्या (Rational Number) :- जो संख्या p/q के रूप में हो जहाँ p और q दो पूर्णांक है तथा q ≠0 परिमेय संख्या कहलाती है . जैसे ¾ , 17/49 , 0, 5, 4/7,8/12………..

9. अपरिमेय संख्या (Irrational Number):- जो संख्या p/q के रूप में न हो .जहाँ p और q पूर्णांक हैं और q ≠0 जैसे √5, √8, √15, √7/4, ά, β. γ, δ, 10, 15 आदि

Note:-  ➡अपरिमेय संख्याऐं कभी भी पूर्ण वर्ग नहीं होती।
           ➡दो परिमेय संख्याओं का योग = परिमेय संख्या होगा ।
           ➡  दो परिमेय संख्याओं की गुणा = परिमेय संख्या होगी ।
           ➡  एक परिमेय एवं एक अपरिमेय का योग = अपरिमेय संख्या होगी ।
           ➡ एक परिमेय एवं एक अपरिमेय की गुणा = अपरिमेय संख्या होगी ।

10. सह अभाज्य संख्या(Co-Prime Number) :-

1. ऐसी संख्याओं का जोड़ा जिनमें उभनिष्ठ गुणनखड न हो अर्थात् संख्याओं का ऐसा जोड़ा जिनको किसी एकही संख्या से विभाजित नही किया जा सकता ।

2. सह अभाज्य में 1 संख्या भाज्य भी हो सकती है।

3. उभनिष्ठ गुणनखण्ड में 1 नही माना जाता है।

जैसे:  3, 8 5, 16 7, 20 आदि जोड़े सहअभाज्य है।

11. प्राकृत संख्या (Natural Number): परिमेय संख्याएं तथा अपरिमेय संख्याएँ मिलाकर  जो संखया प्राप्त होती है  उसे वास्तविक संखया कहते हैं ।  वास्तविक संखया या तो परिमेय होती है है या अपरिमेय ।   
आम गणना में प्रयोग होने वाली सभी संख्यायें वास्तविक संख्यायें कहलाती हैं।
इन्हें  "वास्तविक संख्या" कहा जाता है क्योंकि ये  काल्पनिक संख्या नहीं हैं।

जैसे: 1, 15.82, −0.1, 3/4,  

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