सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Reasoning in hindi

प्रतियोगि परीक्षा में आने वाले रिजनिंग के सभी अध्याय आपके लिए एकदम सरल रूप में उपलब्ध कराने की कोशिश की हैं...और जो अध्याय Open नही हो रहे वो जल्द से जल्द उपलब्ध करा दिए जायेगें!
अगर आपकी कोई राय है तो हमे जरूर बताये...
► वेन आरेख (Venn Diagram)
► तार्किक समझ (Logical Thinking)
► गणितीय संक्रियाएँ (Mathematical Operations)
► कोडेड इन-इक्वलिटी (Coded Inequalities)
► शृंखला और संख्या पहेली (Series and Number Puzzle)
► बैठकी व्यवस्थीकरण (Seating Arrangement)
► न्याय (Syllogism)
► विश्लेषणात्मक तर्कशक्ति (Analytical Reasoning)

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बैठक व्यवस्था

    बैठक व्यवस्था      By:-A.K.Sihag     arvindk608@gmail.com    +91 9784673785                               परिचय ⇒    बैठने की व्यवस्था विषय में,  मूलतः लोगो के समूह को दी गयी परिस्थितयो के अनुसार व्यवस्थित करने के प्रश्न पूछे जाते है. वह शायद एक मेज के चारो ओर बैठे हो सकते है, तथा जिनमे मेज की आकृति कुछ भी जैसे वृताकार, वर्ग, आयताकार, पंचभुजी या अन्य हो सकती है. इस विषय के प्रश्नों को हल करने के लिये समीकरण में दी गयी जानकारी को आधार बनाया जाता है. ⇒    यह किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए रीजनिंग भाग का सबसे महत्वपूर्ण भाग है(विशेषतौर पर बैंक पीऔ की परीक्षा के लिए).  इस भाग में,  इस विषय के प्रश्न एक जानकारी के समूह पर आधारित होते है जिनमे परिस्थितियों का समूह होता है जोकि छुपी हुई जानकारी प्रदान करते है तथा जिन...

Math#quiz-2

00:00 सभी उत्तर देखें 👉 Q1. C Q2. D Q3. D Q4. B Q5. B Q6. D Q7. D Q8. D Q9. B Q10. B Q.11 C Q.12 A Q.13 C Q.14 B Q.15 C (Type a title for your page here) Font Awesome Icons व्हाट्सप्प (WhatsApp) पर गणित, रिजनींग व GK की टेस्ट सीरीज प्राप्त करने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप में जुड़ीये Join WhatsApp

राजस्थान की चित्रकला

राजस्थान की चित्रकला By:-A.K.Sihag arvindk608@gmail.com +91 9784673785 राजस्थानी चित्रकला अपनी कुछ खास विशेषताओं की वज़ह से जानी जाती है। ब्राउन महोदय के अनुसार राजस्थानी चित्रकला का उदभव राजपूताना शैली से माना जाता है। राजस्थान की विभिन्न चित्र कलाओं के अधिकांश चित्र गोपी कृष्ण कानोड़िया संग्रहालय (उदयपुर) मे संग्रहित है।   प्राचीनता    प्राचीनकाल के भग्नावशेषों तथा तक्षणकला, मुद्रा कला तथा मूर्तिकला के कुछ एक नमूनों द्वारा यह स्पष्ट है कि राजस्थान में प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से ही चित्रकला का एक सम्पन्न रुप रहा है। वि. से. पूर्व के कुछ राजस्थानी सिक्कों पर अंकित मनुष्य, पशु, पक्षी, सूर्य, चन्द्र, धनुष, बाण, स्तूप, बोधिद्रम, स्वास्तिक, ब्रज पर्वत, नदी आदि प्रतीकों से यहाँ की चित्रकला की प्राचीनता स्पष्ट होती है। वीर संवत् ८४ का बाड़ली-शिलालेख तथा वि. सं. पूर्व तीसरी शताब्दी के माध्यमिक नगरी के दो शिलालेखों से भी संकेतित है कि राजस्थान में बहुत पहले से ही चित्रकला का समृद्ध रुप रहा है। बैराट, रंगमहल तथा आहड़ से प्राप्त सामग्री पर वृक्षावली, रेखावली तथा रेखाओं क...