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न्याय संगत

 न्याय संगत By:-A.K.Sihag arvindk608@gmail.com www.kitabeekida.com 09784673785 न्याय, मध्याश्रित अनुमान का वह रूप है, जिसमें दिए गए दो या दो से अधिक कथनों या आधार वाक्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाता है। अर्थात दिये गए दो या दो से अधिक कथनों के आधार पर किसी तर्कसंगत निष्कर्ष पर पहुँचना, न्याय कहलाता है। इस प्रकार की परीक्षा में दो या दो से अधिक आधार वाक्य या कथन (Statement or Premises) दिये गए होते हैं तथा उन पर आधारित दो या दो से अधिक निष्कर्ष (Conclusions) दिये गए होते हैं। आपको इन कथनों को सत्य मानते हुए चाहे वे सर्वज्ञात तथ्यों एवं सर्वमान्य मान्यताओं से सर्वथा परे क्यों न हों, यानी सभी मान्यताओं की अवहेलना करते हुए दिए कथनों के आधार पर तर्कसंगत निष्कर्ष ज्ञात करना होता है। चूँकि न्याय निगमनात्मक अनुमान है। अतः, निगमन के नियमानुसार निष्कर्ष, कथनों या आधार वाक्यों से अधिक व्यापक नहीं निकाले जाने चाहिए। कुछ महत्वपूर्ण संकेत:- I. सर्वव्यापी सकारात्मक: इसे तर्क वाक्य में, ‘A’ से निरूपित किया जाता है। II. सर्वव्यापी नकारात्मक: इसे तर्क वाक्य में, ‘E’ से नि...